कमला नेहरू अस्पताल इलाहाबाद में दी जा रही है एक्सपायरी डेट की दवा, मरीज की मौत की

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प्रयागराज लालापुर यह पूरा मामला प्रयागराज कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल का है, जहां सर्वेश पाण्डेय ग्राम पचवारा बेला मुंडी लालापुर के निवासी हैं जो एक किसान हैं, का पिछले 18 माह से कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल में डॉ बी. पॉल के निरीक्षण में इलाज चल रहा है। इस बीच 21 जनवरी को उन्हें दौरा पड़ा और आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां स्थिति नाजुक बताकर उन्हें ICU में भर्ती किया गया। चूंकि इनका मुख्यमंत्री राहत कोष (CMR Fund) से इलाज चल रहा था इसलिए कोई भी दवा अस्पताल से ही लेना पड़ता था।

लगातार 12 दिन तक सर्वेश पाण्डेय को वार्ड नं.-6 बेड नं.-23 में भर्ती रखा गया। जब भी डॉक्टर से पूछा जाता तो बोलते कि रिपोर्ट तो नॉर्मल है थोडी सूजन है। फिर एक फरवरी को उन्हें डिस्चार्ज किया गया और 15 दिन के बाद दिखाने के लिए कहा गया। सर्वेश पाण्डेय के परिवार वाले खुशी से अपने मरीज को घर ले गये।

परिजनों ने घर पहुंचकर डॉक्टर के बताये अनुसार दवा देने लगे। इस बीच 7 फरवरी को फिर से सर्वेश पाण्डेय को दौरा पड़ा और रात के समय ही एम्बुलेंस से परिजन उन्हें कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल ले गये। परिजन परेशान हुए आखिर कैसे तबीयत फिर बिगड़ गई क्योंकि छह दिन पहले ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। अस्पताल पहुंचकर डॉ बी. पॉल को दिखाया गया तथा उनके परिवार वाले से 500/- फीस ली गई। कहा गया कि अस्पताल के डॉक्टर रात के समय प्राइवेट में भी मरीजों को देखते हैं। इस दौरान अस्पताल प्रशासन की ओर से रसीद भी नहीं दी गई। डॉक्टर ने मरीज को भर्ती कर लिया तथा एक बार फिर सर्वेश पांडेय 12 दिन तक अस्पताल में ही रहे। जब डाँ से पूछा गया कि यहाँ पर दवा के बाद तो दौरा नहीं आया और घर ले जाने के 5 दिन बाद ही दौरा आने लगा तो डॉक्टर ने कहा ये बिमारी ही ऐसी है। इतना कहकर उन्होंने मरीज के घरवालों को शान्त कर दिया।

आश्चर्य तो तब हुआ जब परिजनों ने 18 फरवरी को मरीज को घर ले जाकर दवा खिलाने के समय देखा तो पाया कि उक्त दवा की एक्सपायरी डेट बीत चुकी है। तब उन्हें अहसास हुआ कि परिवार वालों ने अस्पताल पर भरोसा कर अपने ही पैर पर कुल्हाणी मार ली। 21 जनवरी को शाम तक सर्वेश पाण्डेय चल फिर रहे थे। 21 तारीख के बाद से आज तक उनकी स्थिति ठीक नहीं हुई और अंत मे 25 फरवरी को उनका देहांत हो गया परिवार पर जैसे पहाड टूट गया हो उन्हें अभी 2 ल़डकी तथा 3 लडके की शादी करनी थी ।

जैसे सर्वेश जी को मुख्यमंत्री राहत कोश से इलाज होता था वैसे ही इस अस्पताल में कई ऐसे लोग है जिनका इलाज यहां होता है और लोग डरते भी है अस्पताल में मरीजों के परिजनों से पूछने पर पता चला कि यहां कैंसर मरीजों की कोई सुनवाई नहीं है हम लोग धक्का खाते रहते है डॉक्टर तो किसी कि भी नहीं सुनता और न ही कभी डिस्चार्ज के बाद डिस्चार्ज समरी भी नही देते हैं मांग करने पर कह देते है कैंसर मरीज का डिस्चार्ज समरी नहीं बनता हम लोंग क्या करें।

साहब कोई कैंसर का डॉक्टर या सस्ता अस्पताल प्रयागराज में नहीं है, कहां जाएं मजबूरी है जिसका फायदा ये लोग उठाते है। बता दें कि कैंसर का बड़ा अस्पताल वाराणसी में है इसलिए प्रयागराज कमला नेहरू अस्पताल में मध्यप्रदेश से लेकर उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़, जौनपुर, पूरा प्रयागराज के कैंसर मरीज आते हैं। इसकी मजबूरी अस्पताल वाले बाकायदा उठाते हैं तथा सरकार के पैसे का भरपूर उपयोग करते हैं।
शिकायत तो बहुत मिलती रहती थी पर प्रूफ नहीं होने से कोई इनका कुछ भी नहीं कर पाता था। हालांकि प्रशासन को अस्पताल की इस करतूत की शिकायत कर दी गई है अब देखना यह होगा कि प्रशासन अस्पताल के खिलाफ क्या कार्यवाही करता है।

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