अजेमर या फिर कहीं की भी म’जा’र का धागा पहनना सही है या ग’लत

0
464

इ’स्ला’म जितना ते’जी से बढ़ रहा है ये तो सभी जानते है लेकिन साथ ही साथ इसमे कई तरह के अ’घंवि’शवा’स मे हमारे इस इ’स्ला’म को जकड़ लहा है लेकिन हमे मा’लुम होता है आखिर ऐसा क्यो रहा लेकिन कुछ नहीं करते है आज ज़रूरत है लोगो को सामने आने का और बताने के क्या करना इ’स्ला’म मे जा़यज है क्या नाजा यज। आज हम इसी बात को जानेगें। हमने अक्सर देखा है मर्द,

वा औ’रतो को म’स्जि’द जाते हुए तथा वहा के घागो को पहनते हुए आखिर ये घागा क्या होता है इसे क्यो पहना जाता है इसके पीछे क्या उद्देश्य होता है आज इसी बात को जानने की कोशीश करेगें। हमने क ई लोगो क़ देखा है जब वो म’ज़ा’र पर जाते है त़ो लाल पीले रगं का घागा पहनते है। हर कोई जानना चाहता है कि म’ज़ा’र पर से लाए गए घागा को पहनना कैसा है पहली बात ये समझीए कि,

अ’ल्ला’ह के अलावा किसी की इबा दत करना कुफ्र है। इसलिए हम एक अ’ल्ला’ह की इबा दत करते है जो एक है उसका कोई मा’बुद नही है ना उसे नीन्द आती है ना उघं। ना ही उसे किसी ने पै’दा किया है ना ही उसे मौ’त आएगी। आस मान जमीन से लेकर हर छोटी सी छोटी चीज़ को अ’ल्ला’ह ने पै’दा किया है। इस लिए हम अ’ल्ला’ह के सिवा किसी की भी इबा दत करना कु’फ्र है। हम जो घागा को गले वा हाथ पर बाघंते है तो पहनने वाले को खु’द को समझना चाहिए,

कि उसने क्या नीयत करके पहना है अगर उसने मुश रीकी नीयत करके पहना है तो ये ह’रा’म है और नाजा यज। लेकिन अगर नीयत मुशरीकी ना हो तो कोई हर्ज नहीं। हम सभी को इ’स्ला’म की ज्यादा से ज्यादा इल्म पाने की अल्लाह तौफीक दे तथा अल्लाह हम सभी को अ’घंवि शवास वा दुसरी मुशरीकी चीजो से महफूज रखे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here